ऊँट के मूह में जीरा मुहावरे का अर्थ क्या होता है |What is the meaning of the phrase cumin in the mouth of a camel
अगर आप किसी भी परीक्षा की तैयारी कर रहे है तो आपके नजर में ये प्रश्न जरूर आया होगा ही । दोस्तों हम आपको इस आर्टिकल में ऊँट के
मूह में जीरा मुहाबरे का अर्थ क्या होता है |What is the meaning of the phrase cumin in the mouth of a camel बताने वाले है कैसे आप
भी इस सवाल का जान सकते है । दोस्तो आप सभी जानते है कि अगर आप की भी तैयारी कर रहे है तो आप सभी के लिए बहुत ही अचछा
मौका है हमारे वेबसाइस पर डेली सामान्य ज्ञान का प्रश्न उत्तर अपलोड किया जाता है ।
- अधजल गगरी छलकत जाए
- अर्थ: कम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है।
- उदाहरण: रमेश को संगीत का थोड़ा ही ज्ञान है, लेकिन वह बड़े उस्ताद जैसा व्यवहार करता है; सच ही है ‘अधजल गगरी छलकत जाए’।
- अन्धा क्या चाहे, दो आँखें
- अर्थ: मनचाही वस्तु का मिल जाना।
- उदाहरण: बेरोजगार को नौकरी मिल जाए तो उसे और क्या चाहिए, ‘अन्धा क्या चाहे, दो आँखें’।
- अन्धों में काना राजा
- अर्थ: मूर्खों के बीच कम पढ़ा-लिखा भी ज्ञानी माना जाता है।
- उदाहरण: पूरे गाँव में केवल सोहन ने दसवीं पास की है, इसलिए वह ‘अन्धों में काना राजा’ बना रहता है।
- अपनी अपनी ढपली, अपना अपना राग
- अर्थ: तालमेल का अभाव होना।
- उदाहरण: कमेटी के सदस्यों में कोई सहमति नहीं थी, सबकी ‘अपनी अपनी ढपली, अपना अपना राग’ था।
- अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत
- अर्थ: समय बीत जाने पर पछताने से कोई लाभ नहीं।
- उदाहरण: पूरे साल तुम पढ़े नहीं, अब फेल होने पर रो रहे हो; ‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत’।
- आम के आम गुठलियों के दाम
- अर्थ: दोहरा लाभ होना।
- उदाहरण: मैंने अखबार पढ़कर रद्दी में बेच दिया, इसे कहते हैं ‘आम के आम गुठलियों के दाम’।
- आसमान से गिरा, खजूर में अटका
- अर्थ: एक मुसीबत से निकलकर दूसरी में फँसना।
- उदाहरण: वह जेल से छूटा ही था कि पुलिस ने उसे चोरी के इल्जाम में फिर पकड़ लिया; ‘आसमान से गिरा, खजूर में अटका’।
- उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे
- अर्थ: अपना दोष होने पर भी दूसरों को धमकाना।
- उदाहरण: गलती तुम्हारी थी और तुम मुझ पर चिल्ला रहे हो; यह तो वही बात हुई ‘उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे’।
- ऊँची दुकान, फीका पकवान
- अर्थ: केवल बाहरी दिखावा, वास्तविकता में कुछ नहीं।
- उदाहरण: उस बड़े होटल का नाम बहुत सुना था, पर खाना बिल्कुल बेकार था; इसे कहते हैं ‘ऊँची दुकान, फीका पकवान’।
- ऊँट के मुँह में जीरा
- अर्थ: जरूरत से बहुत कम मिलना।
- उदाहरण: पहलवान को नाश्ते में एक बिस्कुट देना ‘ऊँट के मुँह में जीरा’ के समान है।
- एक पन्थ दो काज
- अर्थ: एक ही साधन से दो काम सिद्ध होना।
- उदाहरण: मैं शहर सामान लेने गया था और मामा जी से भी मिल आया; इसे कहते हैं ‘एक पन्थ दो काज’।
- एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा
- अर्थ: बुरा व्यक्ति और बुरी संगत में पड़कर और बुरा हो जाना।
- उदाहरण: वह पहले से ही शराबी था, अब जुआरियों के साथ रहने लगा; ‘एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा’।
- एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है
- अर्थ: एक बुरा व्यक्ति पूरे समूह को बदनाम कर देता है।
- उदाहरण: टीम में एक खिलाड़ी अनुशासनहीन था, जिससे पूरी टीम का नाम खराब हुआ; ‘एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है’।
- ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डरना
- अर्थ: कठिन काम शुरू करने पर आने वाली बाधाओं से नहीं डरना चाहिए।
- उदाहरण: जब तुमने व्यापार शुरू कर ही दिया है, तो घाटे से क्या डरना; ‘ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डरना’।
- कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली
- अर्थ: दो असमान व्यक्तियों की तुलना करना।
- उदाहरण: तुम अपनी तुलना टाटा-बिड़ला से कर रहे हो? ‘कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली’।
- काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती
- अर्थ: चालाकी या छल से काम एक ही बार निकलता है।
- उदाहरण: तुमने एक बार मुझे धोखा दे दिया, अब दोबारा नहीं दे पाओगे; ‘काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती’।
- खोदा पहाड़, निकली चुहिया
- अर्थ: बहुत कठिन परिश्रम करने पर बहुत कम फल मिलना।
- उदाहरण: दिनभर पुलिस ने छापेमारी की पर हाथ में कुछ नहीं आया; ‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया’।
- खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे
- अर्थ: लज्जित होकर क्रोध करना।
- उदाहरण: बहस में हार जाने पर वह चिल्लाने लगा, इसे कहते हैं ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’।
- घर का भेदी लंका ढाए
- अर्थ: आपसी फूट से विनाश होता है।
- उदाहरण: मैनेजर ने कंपनी के गुप्त राज दूसरी कंपनी को बता दिए; सच है ‘घर का भेदी लंका ढाए’।
- घर की मुर्गी दाल बराबर
- अर्थ: पास की वस्तु या व्यक्ति का महत्व न समझना।
- उदाहरण: मेरा भाई डॉक्टर है, पर माँ पड़ोसी डॉक्टर से सलाह लेती है; ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’।
- चोर की दाढ़ी में तिनका
- अर्थ: अपराधी हमेशा सशंकित रहता है।
- उदाहरण: जब पुलिस आई तो सोहन डरकर छिप गया; ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’।
- छोटा मुँह बड़ी बात
- अर्थ: अपनी हैसियत से बढ़कर बात करना।
- उदाहरण: नौकर का मालिक को उपदेश देना ‘छोटा मुँह बड़ी बात’ है।
- जिसकी लाठी, उसकी भैंस
- अर्थ: शक्तिशाली की ही विजय होती है।
- उदाहरण: गरीब की जमीन पर दबंग ने कब्जा कर लिया; ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’।
- जितने मुँह उतनी बातें
- अर्थ: एक ही घटना पर अलग-अलग राय होना।
- उदाहरण: गाँव में चोरी क्या हुई, ‘जितने मुँह उतनी बातें’ होने लगीं।
- जैसा देश, वैसा भेष
- अर्थ: जहाँ रहना हो, वहाँ की परिस्थितियों के अनुसार ढलना।
- उदाहरण: जापान जाकर मैंने भी वहाँ के नियम अपना लिए, ‘जैसा देश, वैसा भेष’।
- जैसी करनी, वैसी भरनी
- अर्थ: कर्म के अनुसार फल मिलना।
- उदाहरण: उसने दूसरों का बुरा चाहा, आज खुद मुसीबत में है; ‘जैसी करनी, वैसी भरनी’।
- जौ के साथ घुन भी पिसता है
- अर्थ: दोषियों के साथ निर्दोष भी सजा पाते हैं।
- उदाहरण: दंगाइयों के साथ पुलिस ने निर्दोष राहगीरों को भी पकड़ लिया; ‘जौ के साथ घुन भी पिसता है’।
- थोथा चना बाजे घना
- अर्थ: गुणहीन व्यक्ति अधिक डिंगें मारता है।
- उदाहरण: उसे काम तो आता नहीं, बस बातें बनवा लो; ‘थोथा चना बाजे घना’।
- दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है
- अर्थ: एक बार धोखा खाने वाला सावधान हो जाता है।
- उदाहरण: पिछले साल व्यापार में नुकसान हुआ था, अब वह हर कदम सोच समझकर उठाता है; ‘दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है’।
- दूर के ढोल सुहावने होते हैं
- अर्थ: दूर से चीजें अच्छी लगती हैं।
- उदाहरण: तुम्हें विदेश में रहना आसान लग रहा है, पर ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’।
- धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का
- अर्थ: कहीं का न रहना।
- उदाहरण: उसने पुरानी नौकरी छोड़ दी और नई मिली नहीं; अब उसकी स्थिति ‘धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का’ जैसी है।
- न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी
- अर्थ: झगड़े की जड़ को ही खत्म कर देना।
- उदाहरण: बच्चे मोबाइल के लिए लड़ रहे थे, पिता ने मोबाइल ही छीन लिया; ‘न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी’।
- नाच न जाने आँगन टेढ़ा
- अर्थ: अपनी कमी छिपाने के लिए दूसरों में दोष निकालना।
- उदाहरण: उसे गाना आता नहीं और कहता है कि माइक खराब है; ‘नाच न जाने आँगन टेढ़ा’।
- नाम बड़े और दर्शन छोटे
- अर्थ: प्रसिद्धि के अनुरूप गुण न होना।
- उदाहरण: उस मिठाई की दुकान की बहुत तारीफ सुनी थी, पर स्वाद बेकार था; ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’।
- नौ नगद न तेरह उधार
- अर्थ: भविष्य के बड़े लाभ से वर्तमान का छोटा लाभ बेहतर है।
- उदाहरण: मैं उधार सामान नहीं बेचता, क्योंकि मेरे लिए ‘नौ नगद न तेरह उधार’ बेहतर है।
- पढ़े फारसी बेचे तेल, यह देखो कुदरत का खेल
- अर्थ: शिक्षित होने पर भी छोटा काम करना।
- उदाहरण: एम.ए. पास करने के बाद वह मजदूरी कर रहा है; ‘पढ़े फारसी बेचे तेल, यह देखो कुदरत का खेल’।
- बगल में छोरा, शहर में ढिंढोरा
- अर्थ: वस्तु पास होने पर भी उसे दूर खोजना।
- उदाहरण: चश्मा सिर पर था और पूरे घर में ढूँढ रहे थे; ‘बगल में छोरा, शहर में ढिंढोरा’।
- बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद
- अर्थ: अज्ञानी व्यक्ति गुणों की परख नहीं कर सकता।
- उदाहरण: उसे शास्त्रीय संगीत सुनाना बेकार है, ‘बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद’।
- बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी
- अर्थ: अपराधी कब तक बचेगा, कभी न कभी पकड़ा जाएगा।
- उदाहरण: वह रोज चोरी करता है, आज पकड़ा ही गया; ‘बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी’।
- बिन माँगे मोती मिलें, माँगे मिले न भीख
- अर्थ: भाग्य से सब कुछ मिलता है, मांगने से कुछ नहीं।
- उदाहरण: वह बिना प्रयास सफल हो गया, इसे कहते हैं ‘बिन माँगे मोती मिलें, माँगे मिले न भीख’।
- बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होय
- अर्थ: बुरा काम करके अच्छे फल की उम्मीद करना व्यर्थ है।
- उदाहरण: तुमने जीवनभर लोगों को सताया, अब सुख चाहते हो; ‘बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होय’।
- भैंस के आगे बीन बजाना
- अर्थ: मूर्ख को उपदेश देना बेकार है।
- उदाहरण: शराबी को शराब छोड़ने के लिए समझाना ‘भैंस के आगे बीन बजाना’ है।
- मान न मान, मैं तेरा मेहमान
- अर्थ: जबरदस्ती गले पड़ना।
- उदाहरण: मैं उसे जानता भी नहीं और वह मेरे घर आकर रुक गया; ‘मान न मान, मैं तेरा मेहमान’।
- मुख में राम, बगल में छुरी
- अर्थ: ऊपर से मित्रता, अंदर से दुश्मनी।
- उदाहरण: सोहन सामने तो मीठा बोलता है पर पीछे से शिकायत करता है; ‘मुख में राम, बगल में छुरी’।
- मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक
- अर्थ: सीमित कार्यक्षेत्र होना।
- उदाहरण: वह गाँव से बाहर कभी गया ही नहीं, ‘मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक’।
- यथा राजा, तथा प्रजा
- अर्थ: जैसा नेता होता है, वैसे ही उसके अनुयायी होते हैं।
- उदाहरण: यदि अधिकारी भ्रष्ट है तो कर्मचारी भी वैसे ही होंगे; ‘यथा राजा, तथा प्रजा’।
- रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई
- अर्थ: बर्बाद होने पर भी घमंड न छोड़ना।
- उदाहरण: उसकी सारी दौलत खत्म हो गई पर रोब अभी भी नवाबों वाला है; ‘रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई’।
- लालच बुरी बला है
- अर्थ: लोभ का फल बुरा होता है।
- उदाहरण: अधिक पैसे के चक्कर में उसने गलत काम किया और जेल गया; ‘लालच बुरी बला है’।
- साँच को आँच नहीं
- अर्थ: सच्चा व्यक्ति किसी से नहीं डरता।
- उदाहरण: मैंने चोरी नहीं की है, इसलिए मैं जाँच से नहीं डरता; ‘साँच को आँच नहीं’।
- हाथ कंगन को आरसी क्या
- अर्थ: प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।
- उदाहरण: मेरी काबिलियत देखनी है तो मेरा काम देखो, ‘हाथ कंगन को आरसी क्या
| यहाँ से पी.डी.एफ. डाउनलोड करें | क्लिक करें |